Wednesday, 8 June 2016

पंजाब की पहचान

बहुत दिनों से लिखना चाहती थी पर संभवतः ये सबसे अच्छा समय होगा इस पर चर्चा करने का...
पंजाब में नशा.....
मुझे ये बात कुछ समझ नहीं आती कि एक पूरा प्रान्त नशे की गिरफ्त में कैसे आ गया? मान भी लिया जाये कि कुछ खलनायकों के समूह ने युवाओं को उकसाया,उन्हें नशे का आदी बनाया तब भी क्या इतना होना पर्याप्त है? फिर उन खलनायकों ने और स्थानों पर भी प्रयास तो अवश्य किया होगा। इस मात्रा में वे कहीँ और क्यों सफल नहीं हुए? इसी नशे की वजह से पंजाब कैंसर की भी चपेट में आ गया है।
पर सिर्फ पंजाब ही क्यों? क्या सरदार और पंजाबी जनों को बहका लेना इतना आसान है? अपने श्रम और उन्नत खेतों के लिए जाना जाने वाला पंजाब और पंजाबी बंधु क्या सिर्फ बहकावे में आ कर नशा करते हैं?
कुछ संभावित उत्तर हैं मेरे पास और मित्र जनों की आपत्ति और असहमति हो सकती है उन पर,परंतु पड़ताल अवश्य होनी चाहिए।
मुझे लगता है कि इसके पीछे आपकी जीवन शैली जिम्मेदार थी।हर बात को बहुत हलके में लेने की प्रवृत्ति एक और जिम्मेदार कारण है।दिन भर हाड़ तोड़ श्रम और रात में क्या?? एक सोच " कमाते ही किसलिए हैं? अच्छा खाने पीने के लिए ही न!" , "मरना तो है ही,तो सारे शौक पूरे कर के मरो" , "जो नहीं पीते वो नहीं मरेंगे क्या"
ऐसी सोच में पहले आप मौज मस्ती करते हैं,जीवन का आनंद उठाते हैं और फिर आनंद आदत हो जाता है।बहुत सारे तेल और मसाले के खाने के पंजाबियों के शौक से कौन वाकिफ नहीं?ये गरिष्ठ भोजन और उस पर शराब का साथ..... और उसे बुरा भी न समझना,बल्कि जो समझे उस पर हंस देना.... ये प्रवृत्ति जिम्मेदार है आपको नशे का गुलाम बनाने के लिए।
जीवन के प्रति ये हल्का रवैया आपको नशे का गुलाम बना देता है। कल्पना कीजिये पंजाब में शराब और अन्य नशा प्रतिबंधित हो जाये!! पंजाबियों की खुद की छोड़िये दुसरे प्रान्त भी सरदारों और पंजाबियों की कल्पना बिना शराब के नहीं कर सकते।
सारी दुनिया संता बंता पर चुटकुले बनाती है पर पंजाबी भाई शराब पर चुटकुले बनाते हैं। शराब पीना आधुनिकता का पर्याय बन गया है। और यही शराब  पिता बेटे के बीच,पति पत्नी के बीच,भाई बहन के बीच आधुनिकता को स्थापित करने का कार्य करती है। बेटियां कौन सी बेटों से कम हैं को सिद्ध करने के लिए जब शराब का सहारा लिया जाये तो समझिये कितना भयावह हो जायेगा परिदृश्य!

उड़ता पंजाब फ़िल्म में  क्या है,मैं नहीं जानती,जानना भी नहीं चाहती। पर इतना अवश्य चाहती हूँ कि फिल्में पंजाबियों के श्रम पर,उनकी जीवंतता पर,उनके भंगड़े पर,उनकी बहादुरी पर बने न कि उनके नशे की आदतों पर।और इसके लिए सबसे पहले पंजाबी भाई समझें कि शराब बेहद बुरी चीज है।इसे शौक ही मत बनाइये कि ये आदत बन पाये।