तुम जब भी कुम्हलाओगे
मैं जल सी शीतलता लाऊंगी
पीड़ा में होगे जब भी तुम
औषधि बन कर आऊँगी
पर मेरा प्रेम परखने को तुम
जान कर मत कुम्हला जाना
मेरी परीक्षा लेने को ही बस
जानी बूझी पीड़ा मत ले आना
प्रेम वही,जो असीमित हो जाये
प्रेमियों की परन्तु,निश्चित सीमाएं हैं
स्नेह वही,जो अनंत हो जाये
नेह-प्रदर्शन की पर,निश्चित गणनाएं हैं
तुम मेरे अपराध क्षमा कर देना
तुम्हारी भूलें मैं भूल जाऊँगी
मेरे पग भटकें तो तुम दिशा दिखा देना
तुमको पथरीले रस्तों से मैं वापस ले आऊँगी
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